चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत
किसानों के अधिकारों की बुलंद आवाज़
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत (6 अक्टूबर 1935 – 15 मई 2011) उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जनपद के सिसौली गाँव में हुआ। वे अपना सम्पूर्ण जीवन किसानों के अधिकार, सम्मान और हितों की रक्षा के लिए समर्पित करने वाले निर्भीक नेतृत्वकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। उनके नेतृत्व में भारतीय किसान यूनियन ने देशभर के किसानों को संगठित कर अनेक ऐतिहासिक आंदोलनों का नेतृत्व किया।
प्रारम्भिक जीवन
महेंद्र सिंह टिकैत का जन्म वर्ष 1935 में सिसौली गाँव में हुआ। पिता के निधन के पश्चात मात्र आठ वर्ष की आयु में उन्हें बलियान खाप का चौधरी बनाया गया। बचपन से ही उन्होंने ग्रामीण जीवन, कृषि व्यवस्था तथा किसानों की समस्याओं को निकट से देखा, जिसने आगे चलकर उन्हें किसान आंदोलन का सशक्त नेतृत्व प्रदान किया।
किसान आंदोलन का नेतृत्व
वर्ष 1987 में उन्होंने किसानों के बिजली बिल माफ करने तथा कृषि हितों की रक्षा के लिए मुज़फ्फरनगर से व्यापक आंदोलन प्रारम्भ किया। इसी आंदोलन ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर किसान नेता के रूप में पहचान दिलाई। उनके नेतृत्व में किसानों ने संगठित होकर अपनी समस्याओं को सरकार के सामने प्रभावी ढंग से रखा।
ऐतिहासिक बोट क्लब रैली
वर्ष 1988 में दिल्ली के बोट क्लब मैदान में आयोजित विशाल किसान रैली में उत्तर प्रदेश सहित अनेक राज्यों से लगभग पाँच लाख किसान सम्मिलित हुए। विजय चौक से इंडिया गेट तक का क्षेत्र किसानों से भर गया। इस ऐतिहासिक आंदोलन के परिणामस्वरूप तत्कालीन केंद्र सरकार ने किसानों की अनेक माँगें स्वीकार कीं, जिनमें गन्ने का बेहतर मूल्य तथा बिजली एवं पानी के बिलों में राहत प्रमुख थी।
लखनऊ आंदोलन
जुलाई 1990 में महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में दो लाख से अधिक किसानों ने लखनऊ में विशाल प्रदर्शन किया। इस आंदोलन का उद्देश्य गन्ने का उचित मूल्य तथा बिजली बिलों में भारी राहत दिलाना था। किसानों की एकजुटता के सामने सरकार को उनकी प्रमुख माँगें स्वीकार करनी पड़ीं।
वर्ष 1992 में वे पुनः लखनऊ पहुँचे, जहाँ उन्होंने किसानों के दस हजार रुपये तक के कृषि ऋण माफ करने की माँग को लेकर लगभग एक महीने तक धरना दिया। इसी वर्ष उन्होंने गाज़ियाबाद में भूमि अधिग्रहण के बदले किसानों को उचित मुआवजा दिलाने के लिए भी आंदोलन का नेतृत्व किया।
संघर्ष और चुनौतियाँ
अपने आंदोलनों के दौरान महेंद्र सिंह टिकैत को अनेक बार गिरफ्तार भी किया गया। वर्ष 2008 में बिजनौर की एक रैली के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया, जिसके लिए उनके गाँव की घेराबंदी तक करनी पड़ी। बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री से क्षमा याचना की, जिसके पश्चात उन्हें रिहा कर दिया गया।
परिवार और विरासत
महेंद्र सिंह टिकैत के निधन के पश्चात उनके दोनों पुत्र किसान आंदोलन से जुड़े रहे। जनवरी 2021 में नए कृषि कानूनों के विरोध में हुए देशव्यापी आंदोलन में उनके पुत्र नरेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष तथा राकेश टिकैत संगठन के प्रमुख प्रवक्ता के रूप में सक्रिय रहे।
निधन
15 मई 2011 को 75 वर्ष की आयु में मुज़फ्फरनगर में हड्डी के कैंसर के कारण उनका निधन हुआ। उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों तथा सामाजिक संगठनों ने उन्हें किसानों का सच्चा, निडर और समर्पित नेता बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रेरणास्रोत
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने यह सिद्ध किया कि संगठित किसान अपनी एकता और शांतिपूर्ण संघर्ष के बल पर अपने अधिकार प्राप्त कर सकते हैं। उनका जीवन किसानों के सम्मान, न्याय और स्वाभिमान के लिए समर्पित संघर्ष का प्रेरणादायक उदाहरण है।